राष्ट्र जागरण, सामाजिक समरसता और चुनौतियों के दृढ़ मुकाबले से ही भारत का उत्थान संभव: विश्व हिंदू परिषद
उल्लेखनीय है कि पिछले १० दिनों से साईं इंटरनेशनल स्कूल में प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है, जिसमें विभिन्न सत्रों में केंद्रीय और क्षेत्रीय अधिकारियों ने अपने विचार रखे। विश्व हिंदू परिषद (वि०हि०प०) के तत्वावधान में आयोजित इस १० दिवसीय प्रांतीय ‘शिक्षा वर्ग’ में राष्ट्र रक्षा, सामाजिक समरसता और संगठनात्मक इतिहास पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम में वि०हि०प० के केंद्रीय सह मंत्री मा० मनोज जी, क्षेत्र सत्संग प्रमुख मा० दिवाकर जी, विधि प्रकोष्ठ के क्षेत्र संयोजक मा० बृजेन्द्र सिंह जी और क्षेत्र धर्म प्रसार प्रमुख (लखनऊ क्षेत्र) मा० प्रदीप जी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हिंदू संस्कृति अनादि और पूर्णतः वैज्ञानिक है, जो ‘कण-कण में भगवान’ के भाव पर आधारित है। हमारे सभी व्रत-त्यौहार पर्यावरण के अनुकूल हैं। विधिक सत्र में कार्यकर्ताओं को गोरक्षा और अवैध धर्मान्तरण विरोधी कानूनों की बारीकियों से अवगत कराते हुए ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ व ‘व्यवसाय जिहाद’ के खिलाफ सजग रहने और पीड़ित बहनों की सुरक्षा हेतु दुर्गावाहिनी और बजरंग दल को सक्रिय करने का आह्वान किया गया।
विशेष बौद्धिक सत्र में मा० प्रदीप जी ने बताया कि हिंदुओं के धर्मान्तरण को रोकने और समाज को सशक्त करने हेतु श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सन् १९६४ को मुंबई के पवई में वि०हि०प० की स्थापना हुई। १९६६ के प्रयाग कुंभ में प्रथम हिंदू सम्मेलन के मंच पर चारों शंकराचार्यों ने ‘हिन्दवः सोदराः सर्वे’ का अमर उद्घोष किया। वर्तमान में परिषद के माध्यम से ५७ हजार सेवा केंद्र संचालित हैं। मा० प्रदीप जी ने साम्यवाद, अलगाववाद और आतंकवाद जैसी चुनौतियों पर सचेत करते हुए बताया कि ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े बजट के साथ धर्मान्तरण का खेल खेला जा रहा है, वहीं कश्मीर में आतंकवाद और देश में नक्सलवाद के जरिए युवाओं को भटकाया गया। समाज को एकजुट होकर इन देशविरोधी ताकतों का पूर्ण बहिष्कार करना होगा।
सत्र अंत में वक्ताओं ने जोर दिया कि जब तक सभी हिंदू जातियां ‘संगत से पंगत तक’ एक साथ नहीं बैठेंगी, तब तक वास्तविक समरसता नहीं आएगी। इस वर्ग का मुख्य उद्देश्य जातिगत भेदभाव मिटाकर राष्ट्र रक्षा के लिए युवाओं को प्रेरित करना है। वर्ग के समापन सत्र में मुख्य रूप से प्रांत अध्यक्ष सह संरक्षक श्री नागेंद्र जी ने आह्वान किया कि “अनुशासन ही वह नींव है जिस पर एक कुशल चरित्र और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण होता है। आप अनुशासन और कर्तव्य का पालन करते हुए आगे बढ़ें।” इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को यह निर्देश दिया गया कि वे स्वच्छ मन से समाज के बीच जाकर कार्य करें और भारत को पुनः हिंदू राष्ट्र बनाने में अपना संपूर्ण सहयोग प्रदान करें।
इस समापन अवसर पर क्षेत्र संयोजक बजरंग दल माननीय पूर्णेन्दु जी, प्रांत संगठन मंत्री दीपेश जी, संयुक्त विभाग संगठन मंत्री दिव्यांशु जी, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख श्री राम कृष्ण मिश्रा जी, विभाग मंत्री गोपाल जी, विभाग सहमंत्री विनोद जी व मनोज शाही जी, विभाग संयोजक दिनेश जी, जिला कार्याध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह जी, जिला उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह जी, जिला उपाध्यक्षा सोमिता श्रीवास्तव जी, विभाग सहमंत्री विनोद सोनकर जी व मनोज शाही जी, जिला मंत्री अभिषेक सिंह “उधम” जी, जिला सहमंत्री डॉ राहुल राय जी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी एवं मातृशक्ति के तमाम पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं की भी कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति रही।





