लालगंअखिल भारतीय विद्या भारती शिक्षा संस्थान के तत्वाधान में वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण

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आजमगढ़ :- लालगंज अखिल भारतीय विद्या भारती शिक्षा संस्थान के तत्वाधान में वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण ,, अखिल भारतीय विद्या भारती शिक्षा संस्थान के तत्वाधान में वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विद्या भारती देश भर के हजारों स्थानों पर लाखों छात्र-छात्राओं , आचार्यों एवं नागरिकों द्वारा पच्चीस सितंबर दो हज़ार छब्बीस को दिन में ग्यारह बजे एक साथ संपूर्ण वंदे मातरम गीत के सामूहिक गायन का आयोजन कर राष्ट्रीय एकात्मता तथा सांस्कृतिक स्वाभिमान का जागरण कर रही है। इसी क्रम में विद्या मंदिर इंटर कॉलेज लालगंज पर वंदे मातरम गीत का सामूहिक गायन ठीक ग्यारह बजे प्रारंभ हुआ।जिसके मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य ओम प्रकाश सिंह तिलखरा थे। मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि वंदे मातरम गीत सात नवंबर अठारह सौ पचहत्तर ईस्वी को प्रसिद्ध बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय चटर्जी द्वारा लिखा गया था। बंकिम चंद्र ने 1882 ईस्वी में प्रसिद्ध उपन्यास आनन्द मठ की रचना की जिसमें इस गीत को सम्मिलित किया गया था। यह गीत संस्कृत और बंगाली भाषा में लिखा गया है। इस गीत को सबसे पहले 1896 में कोलकाता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर जी ने गाया था।आजादी के बाद 1950 ईस्वी में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। आजादी के दीवाने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने इसे 1905 ईस्वी में राजनीतिक नारे के रूप में स्वीकार किया। इस तरह बंदे मातरम गीत हजारों ,लाखों, करोड़ों देशवासियों के लिए जन्म भूमि पर मर मिटने के लिए प्रेरणा देने वाला गीत बन गया। इस गीत में भारत माता के शस्य श्यामला रूप को दर्शाया गया है।

नवदुर्गा के रूप में भी उनकी वंदना की गई है। वंदे मातरम गीत आज पूरे देश में एक साथ करोणों लोगों द्वारा गाया गया है।जो एक विश्व रिकॉर्ड है। यह गीत के ग्रिनीज बुक ऑफ वर्ल्डस् में सम्मिलित होने के पूरे आसार हैं। प्रधानाचार्य भानु प्रताप त्रिपाठी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे वीरों ने जो हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए, अपने संपूर्ण जीवन को मातृभूमि के लिए समर्पित करके लाठियां खाईं, गोलियां खाईं, कष्ट सहे ,जेलों में गये लेकिन कभीं उनका उत्साह कम नहीं हुआ ऐसे वीर नौजवानों को प्रेरणा देने वाला गीत है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ओम प्रकाश सिंह,प्रधानाचार्य भानु प्रताप त्रिपाठी व प्रबंधन तंत्र के पदाधिकारियों ने मां भारती तथा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित करके तथा पुष्प अर्पित करके किया। मुख्य अतिथि के उद्बोधन के बाद ठीक 11:00 बजे वंदे मातरम गीत प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर प्रधानाचार्य भानु प्रताप त्रिपाठी, अतुल बरनवाल, डॉक्टर सतीश चंद्रा, मालिक राम, रवि प्रकाश बरनवाल, बृजेश जायसवाल, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा ,सुधीर बरनवाल ,मनोरमा देवी, डॉक्टर विजय बहादुर सिंह, यशवंत ,लाल बहादुर सिंह, संजय पाठक ,रामनरेश यादव, आनंद कुमार ,अंजू मौर्य ,अनामिका सिंह ,शरद दिक्षित ,शेषमणि, गिरधारी लाल, अनुराग, उमाकांत, राकेश सरोज, लोकनाथ, सुजीत विश्वकर्मा आदि लोग तथा विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राओं ने वंदे मातरम गीत में भाग लेकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य भानु प्रताप त्रिपाठी ने तथा संचालन डॉक्टर विजय बहादुर सिंह ने किया।

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