आजमगढ़ जनपद से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जहां नगर पालिका परिषद अध्यक्ष को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा-48 के तहत की गई है।
मामले में कुल 8 गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिन्हें जांच के दौरान प्रथम दृष्टया पूर्ण रूप से सिद्ध पाया गया। विभिन्न स्रोतों से मिली शिकायतों के आधार पर ने जांच प्रक्रिया शुरू कराई थी। उप जिलाधिकारी और अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित समितियों ने अलग-अलग स्तर पर जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने 3 जुलाई 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके जवाब में डॉ. सबा शमीम ने 2 अगस्त 2024 को अपना पक्ष रखा, लेकिन 20 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रति-परीक्षण आख्या में उनके जवाब को आधारहीन बताते हुए सभी आरोपों को सिद्ध माना गया।
शासन ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए 14 अगस्त, 13 अक्टूबर और 6 नवंबर 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई के अवसर भी दिए, लेकिन वह किसी भी निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुईं।
अंततः उपलब्ध साक्ष्यों, जांच रिपोर्टों और जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर राज्यपाल की स्वीकृति के बाद शासन ने उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। इस कार्रवाई के बाद मुबारकपुर नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष का पद रिक्त हो गया है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब आगे नगर पालिका के संचालन और नए अध्यक्ष के चयन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।




