वीरांगना भवानी स्मारक स्थल : नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा
‘श्री सर्वेश्वरी समूह’ संस्थान अपने ‘सर्वेश्वरी’ नाम से ही नारी के प्रति आदर और सम्मान का भाव प्रकट करती है। संस्थापक परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी ने अपने शिष्यों-अनुयायियों को नारी मात्र के प्रति मातृभाव रखने की प्रेरणा दिया है। अघोर पीठ श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम के समक्ष विशाल पीपल वृक्ष के नीचे सन् 1680 में वीरांगना भवानी जी के सम्मान में स्थापित यह प्रतिमा और शिलालेख नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा देता है। वर्ष 1961 ई. में अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम की स्थापना से पूर्व, पुराने जी. टी. रोड के दक्षिणी तल पर स्थित वीरांगना भवानी का यह स्मारक स्थल जंगली झाड़ियों के बीच उपेक्षित पड़ा था। परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु ने इसका जीर्णोद्धार करवाकर चबूतरे आदि का निर्माण करवाया। आज सर्वेश्वरी समूह के लाखों अनुयायियों के साथ–साथ स्थानीय लोग वीरांगना भवानी का नित्यप्रति दर्शन प्राप्त कर नारियों के प्रति सम्मान रखने की प्रेरणा लेते हैं। इसमें भी विशेष रूप से नारियाँ अपने ऊपर होने वाले अत्याचार-अनाचार आदि से लड़ने की शक्ति पाती हैं। भारतीय संस्कृति और सभ्यता सदैव से ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव की पोषक और संवाहक रही है। जब से मुगल आक्रान्ताओं और अंग्रेजों की पाशविक प्रवृत्ति और संस्कृति का दुष्प्रभाव हमारी भारतीय संस्कृति पर पड़ा, तब से उनकी पाशविक प्रवृत्ति ने हमारे पारिवारिक-सामाजिक जीवन शैली को काफी हद तक नष्ट-भ्रष्ट कर दिया है। इस तरह के स्मारक स्थल हमारे समाज को निरंतर प्रेरणा प्रदान करते हैं।





