उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच योगी सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। उपभोक्ताओं की परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार का साफ संदेश है कि जब तक आम उपभोक्ता पूरी तरह संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक संबंधित कंपनियों को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने रविवार को स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कंपनियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिन एजेंसियों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने और उनसे जुड़ी सेवाएं संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने अपेक्षित ईमानदारी और गंभीरता से काम नहीं किया। इसका सीधा असर आम बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार बढ़ रहीं शिकायतें
प्रदेश के विभिन्न जिलों से स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के संचालन, रिचार्ज के बाद भी कनेक्शन बहाल न होने, तकनीकी गड़बड़ियों और उपभोक्ता असुविधा से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही गुणवत्ता जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर चुकी है। इसके साथ ही पुराने मीटरों को हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। समीक्षा बैठक में ऊर्जा मंत्री ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को भुगतान के बावजूद घंटों तक बिजली कनेक्शन का इंतजार करना पड़ रहा है। अभियंताओं द्वारा लगातार अनुरोध किए जाने के बाद भी कई मामलों में कंपनियां समय पर कनेक्शन बहाल नहीं कर रहीं। ऐसे में यह केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ अन्याय की स्थिति है।




