ए एन मेमोरियल स्कूल अराजीबाग, आजमगढ़ में वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान के तत्वाधान में आध्यात्मिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें संत कबीर आध्यात्मिक परंपरा के वाहक विषय पर विचार विमर्श किया गया।
सभा की अध्यक्षता श्री अशोक कुमार अग्रवाल ने की तथा संचालन आध्यात्मिक सचिव श्री सुरेन्द्र नाथ पांडेय ने किया
श्री विरजा शंकर राय ने बताया कि संत कबीर का जन्म 1398 ईसवी में ज्येष्ठ पुर्णिमा के दिन लहरतारा, वाराणसी में हुआ था, जिनका पालन पोषण नीरू और नीमा जुलाहा दंपति ने किया था।श्री प्रेमचन्द श्रीवास्तव ने बताया कि संत कबीर पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन आत्मज्ञान से सब कुछ जानते थे ।श्री सुरेन्द्र नाथ पांडेय ने बताया कि कबीर के गुरु स्वामी रामानंद थे जो पहले गुरुमंत्र देना नहीं चाहते थे। कबीर जी पंचगंगा घाट पर रात में सीढ़ियों पर लेट गए ।भोर में स्नान के लिए जाते समय कबीर के ऊपर उनका पैर पड़ गया। रामानंद जी ने राम राम*कहते हुए पैर वापस किए तो कबीर ने कहा गुरुदेव आप ने तो राम राम का मंत्र मुझे दे दिया।तीव्र इच्छा देखकर रामानंद जी ने उन्हें शिष्य स्वीकार कर लिया।
कबीर ने धार्मिक आडंबर और पाखंडवाद का विरोध किया ।सत्य प्रेम ईश्वर एक की भक्ति का प्रचार किया। डाक्टर निरंकार प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि कबीर की पत्नी का नाम लोई था तथा उनके पुत्र कमाल, पुत्री का नाम कमाली था।कबीर जी की रचनाएं साखी शब्द रमयनी कहलाती हैं जिन्हें बीजक कहते हैं।संत कबीर कहते हैं कि पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय । ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय ।
अंत में अध्यक्ष अशोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि सन्त कबीर जी निर्गुण ब्रह्म को मानते थे, निराकार ईश्वर की पूजा करते थे किसी मूर्ति पूजा अथवा स्थान में विश्वास ना करते हुए उनका कहना था कि कण- कण में और हर प्राणी में ईश्वर निवास करता है , सच्चा धर्म शुद्ध भावना और मन की पवित्रता में है, अहंकार का त्याग कर ही ईश्वर से मिलन एवं साक्षात्कार हो सकता है। उन्होंने एक साधारण जुलाहा के रूप में सामान्य जीवन यापन करते हुए उच्च आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया, ऐसे थे महान संत कबीर जिन्होंने हमें बातों – बातों में अध्यात्म के गुण एवं रहस्यों के बारे में बता दिया।
लूट सके तो लूट लो राम नाम की लूट : पीछे फिर पछताओगे प्राण जाएंगे छूट। 1518 ईसवी में मगहर में कबीर जी ने अपने शरीर का त्याग किया।
इस अवसर पर दिलशेर यादव, प्रभा शंकर त्रिपाठी,सचिदानंद सिंह, वेदप्रकाश, रमेश चंद गुप्ता, विश्वनाथ अग्रवाल, जनार्दन विद्यार्थी, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, भूपेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।





