ऋषि दुर्वासा की धरती पर शिक्षा की नई मिसाल, गरीब बच्चों के लिए मां देवरती शिक्षण संस्थान बना उम्मीद
ऋषि दुर्वासा की तपोस्थली के क्षेत्र में शिक्षा और समाजसेवा की एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। चकगजड़ी गांव स्थित मां देवरती शिक्षण संस्थान आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत, नृत्य, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और ग्रामीणों का मन मोह लिया।
इस पहल के पीछे समाजसेवी राजमणि यादव की सोच है। उनका उद्देश्य है कि आर्थिक परेशानी किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा न बने। संस्थान में हाईस्कूल स्तर तक बच्चों को योग्य शिक्षकों के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
राजमणि यादव का कहना है कि वह स्वयं आर्थिक संघर्षों के बीच आगे बढ़े हैं, इसलिए वह चाहते हैं कि गांव और आसपास के जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के लिए परेशान न होना पड़े। शिक्षा के साथ बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। साथ ही सामाजिक क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले लोगों का भी सम्मान हुआ।
ऋषि दुर्वासा की इस धरती पर शिक्षा की यह पहल सिर्फ एक विद्यालय की कहानी नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक कारणों से अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित रहते हैं।
मां देवरती शिक्षण संस्थान का संदेश साफ है—प्रतिभा किसी की आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती, जरूरत है तो सिर्फ सही अवसर और मार्गदर्शन की।





