तालाब की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, मंडलायुक्त से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
आजमगढ़। लालगंज तहसील क्षेत्र के मोहनपुर पटवास गांव के ग्रामीणों ने मंडलायुक्त आजमगढ़ को शिकायती पत्र देकर गांव के सार्वजनिक तालाब की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा लालगंज से समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज समेत उनके परिवार के कुछ लोगों ने तालाब की सरकारी भूमि पर फार्म हाउस बनवा लिया है, जबकि तालाब के अन्य हिस्से का उपयोग खेती और मत्स्य पालन के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर तालाब को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।

शिकायत पत्र के अनुसार, ग्राम मोहनपुर पटवास स्थित आराजी संख्या 137, रकबा 7.798 हेक्टेयर, तालाब खाते की भूमि है, जिसका वर्षों से ग्रामीण सार्वजनिक उपयोग करते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तालाब का उपयोग पशुओं को नहलाने, पानी पिलाने, ग्रामीणों के दैनिक उपयोग तथा मछली पकड़ने सहित अन्य सामुदायिक कार्यों के लिए किया जाता था। आरोप है कि वर्तमान में तालाब की भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे गांव के लोग सार्वजनिक सुविधा से वंचित हो गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दरोगा प्रसाद सरोज, प्रमोद सरोज, मनोज सरोज, अभिषेक सरोज और विनोद सरोज ने मिलकर तालाब की भूमि पर कब्जा किया है। उनके अनुसार, तालाब के एक हिस्से पर फार्म हाउस बनाया गया है, जबकि अन्य हिस्सों में खेती और मत्स्य पालन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे सार्वजनिक संपत्ति का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी आजमगढ़ को जांच के निर्देश दिए गए थे और जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी लालगंज को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अब तक राजस्व विभाग की जांच पूरी नहीं हुई है और लेखपाल तथा कानूनगो की रिपोर्ट लंबित है। उनका यह भी आरोप है कि प्रभावशाली होने के कारण मामले की जांच प्रभावित की जा रही है और कार्रवाई में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
ग्रामीणों ने मंडलायुक्त से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो राजस्व अभिलेखों के अनुसार सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराकर पुनः जनसामान्य के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए। साथ ही जांच में लापरवाही अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।






