तिरंगे की शान और अघोरेश्वर भगवान राम की सेवा की वाणी | पड़ाव आश्रम से राष्ट्र को संदेश
वाराणसी की पावन धरती पर गंगा किनारे पड़ाव का वह परिसर, जहां अध्यात्म के साथ मानव सेवा को भी साधना का स्वरूप दिया गया। यही वह स्थान है, जहां अघोरेश्वर भगवान राम जी की सेवा और मानव कल्याण की परंपरा आज भी आगे बढ़ रही है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसी अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम् और अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम में तिरंगा शान से फहराया गया।
15 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में बच्चों, अभिभावकों, आश्रमवासियों, श्रद्धालुओं और संस्था से जुड़े लोगों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से पूरा वातावरण देशभक्ति से भर गया।

लेकिन इस आयोजन की खास बात सिर्फ तिरंगा फहराना नहीं था।
खास बात थी—अघोरेश्वर भगवान राम जी की उस विचारधारा को याद करना, जिसमें मानव सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया।
अघोरेश्वर भगवान राम जी ने अपना जीवन समाज के गरीब, पीड़ित, शोषित और जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार श्री सर्वेश्वरी समूह की स्थापना 1961 में हुई और पड़ाव, वाराणसी में अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम की स्थापना 1962 में की गई।
आज उसी सेवा परंपरा की झलक स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में भी दिखाई दी।
अवधूत भगवान राम नर्सरी विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने देशभक्ति से भरी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
किसी प्रस्तुति में देशभक्ति का संदेश था, तो किसी में वीर शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी के संघर्ष और योगदान को याद किया गया।
बच्चों की प्रस्तुतियों ने मौजूद लोगों को यह संदेश दिया कि देश की आजादी सिर्फ इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए जिम्मेदारी भी है।
कार्यक्रम में श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद औघड़ बाबा गुरुपद संभव राम जी ने बच्चों और अभिभावकों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि संस्कार, अनुशासन और प्रेरणा से ही महान राष्ट्र का निर्माण होगा।
बाबा जी ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को केवल स्कूल में ही नहीं, बल्कि घर पर भी अच्छे संस्कार दिए जाने चाहिए। क्योंकि बच्चे बड़ों के व्यवहार और आचरण से बहुत कुछ सीखते हैं।
यानी संदेश बिल्कुल साफ है—
अगर आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाना है, तो उसे शिक्षा के साथ संस्कार देना होगा।
अगर राष्ट्र को मजबूत बनाना है, तो समाज में सेवा और अनुशासन की भावना बढ़ानी होगी।
इसी अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, प्रशस्ति-पत्र और मेधा छात्रवृत्ति देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सुरक्षा और सर्पदंश से बचाव को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया।
पड़ाव का यह आश्रम आज भी अघोरेश्वर भगवान राम जी की सेवा भावना की याद दिलाता है। यहां आध्यात्मिक वातावरण के साथ स्वास्थ्य और जनसेवा से जुड़े कार्य भी संचालित होते हैं। आश्रम परिसर में अघोरेश्वर भगवान राम महाविभूति स्थल और योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान केंद्र भी सेवा गतिविधियों से जुड़े हैं।
और शायद यही इस स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा संदेश भी है—
तिरंगा हमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी याद दिलाता है और अघोरेश्वर भगवान राम जी की वाणी हमें मानवता के प्रति जिम्मेदारी का रास्ता दिखाती है।
देशभक्ति केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है।
देशभक्ति तब पूरी होती है, जब हम अपने समाज, अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों और आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प लें।
तिरंगे की शान, संस्कारों की पहचान और मानव सेवा का संदेश—यही पड़ाव आश्रम के स्वतंत्रता दिवस की सबसे बड़ी तस्वीर रही।





