हमारी अपनी जिम्मेदारी है कि किसी के साथ मानवीय भूल न हो: शशी पांडेय
आजमगढ़। पूर्वांचल के बहू प्रतिष्ठित बच्चों के अस्पतालों में शुमार जनपद का रैनबो अपने मरीजो के स्वास्थ्य सेवाओं का ध्यान रखते हुए ही मानवीय संवेदनाओं के साथ आज स्वयं आगे आया और अस्पताल में दो दिन पूर्व नवजात बच्चे के बदलने को लेकर हुए बवाल और हंगामे के बीच रोडवेज स्थित एक होटल में अस्पताल प्रबंधन एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्तप्रेसवार्ता की, अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले पर खबर और फेसबुक वार के बीच अपना विचार प्रकट करते हुए कहा कि समाज में कुछ लोग ऐसे है जो विचारो को समझने के बजाय अलग ही अपनी राय रखते हैं और इसका खामियाजा आमजन को उठाना पड़ता है मरीज के प्रति प्रबंधन कभी भी अपनी जिम्मेदारियो से पीछे नही हट सकता “ मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना रहा की रेनबो हॉस्पिटल पिछले करीब दो दशक से आजमगढ़ की जनता को अपनी सेवाएं दे रहा है और पूर्व में कभी भी ऐसी शिकायत नहीं रही कि इस तरीके की घटनाएं हुई हुई हो पिछले दिनो घटित घटनाओ का जिक्र करते हुए स्वयं की मानवीय भूल” बताया, जबकि आईएमए ने निजी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की चुनौतियों को लेकर भी अपनी बात रखी।

इस दौरान रेनबो अस्पताल के मैनेजिंग प्रबंधक ने कहा कि पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर भिन्न भिन्न खबरे आ रही है जो कि प्रबंधन इससे आहत तो जरूर है । लेकिन अपनी जिम्मेदारियां लेकर चलता रहेगा, उन्होंने कहा कि अस्पताल के एक स्टाफ सदस्य से मानवीय त्रुटि हो गई थी, जिसके कारण टैगिंग में गड़बड़ी हुई और नवजात बच्चों की अदला-बदली जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घटना जानबूझकर नहीं की गई थी।
उन्होंने कहा कि घटना सामने आने के बाद से अस्पताल प्रशासन ने स्वयं गंभीरता दिखाते हुए संबंधित स्टाफ के खिलाफ अपने स्तर से कार्रवाई की है। और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाओं में सुधारात्मक कदम भी उठाया जा रहा है
उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओर से समाचार प्रकाशन पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है, बल्कि तथ्यों को सही तरीके से सामने लाने की अपेक्षा की गई है।
वहीं आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. सुभाष सिंह ने कहा कि मामले को लेकर कई तरह की गलतफहमियां उत्पन्न हो गई थीं, जिन्हें स्पष्ट करने के उद्देश्य से ही आज अस्पताल प्रबंधन और स्वयं में ही मौजूद हूं उन्होंने निजी अस्पतालों में बाउंसर और गार्ड रखने को लेकर लग रहे “गुंडागर्दी” के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया।
डॉ. सुभाष सिंह ने कहा कि कई बार मरीज के परिजन आवेश में आकर अस्पताल में हंगामा करने लगते हैं। कुछ मामलों में उत्तेजित लोग अस्पताल पहुंच जाते हैं और स्टाफ के साथ अभद्रता या मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। यह भी एक मानवीय दृष्टिकोण होता है उन्होंने कहा कि एक मरीज को देखने के लिए कई बार 10 से 15 लोग एक साथ अस्पताल में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे अस्पताल का सामान्य संचालन प्रभावित होता है।मरीजो के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही अस्पताल को अपनी भी कुछ व्यवस्थाएं करनी पड़ती है यह ऐसा इसलिए किया जाता है कि किसी सर्जरी के बाद इंफेक्शन का डर ज्यादा होता है
उन्होंने किया कि अस्पतालों में गार्ड रखने का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना होता है। सामान्य तौर पर गार्डों को मरीज के परिजनो से उलझने का निर्देश नहीं होता है बावजूद इसमे यदि किसी गार्ड या अस्पताल स्टाफ के व्यवहार को लेकर शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा कि अस्पताल, प्रशासन, मीडिया और आमजन सभी के सहयोग से ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करता है
इस दौरान आईएमए की ओर से डॉ. आसिफ एवं डॉ. अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे।




